थाना प्रभारी पैकोलिया सुभाष मौर्या की सूझ-बूझ से महुआ गांव में जातीय दंगा -फसाद फैलाकर कुछ लोगों को अशांति का माहौल बनाने में नही मिली कामयाबी।
सुधांशु मिश्र
संवाददाता बस्ती। बस्ती जिले के थाना पैकोलिया के अन्तर्गत महुआ गांव में दो अक्टूबर को दुर्गा मूर्तिविसर्जन करने जाते समय केबिल टूटने को लेकर पहले कुछ लोगों द्वारा एक पक्ष को उकसाकर प्रायोजित साजिश रची गई जब दूसरे पक्ष के लोग मूर्ति विसर्जन कर घाट से वापस आए तो जगनेटर उतारने विनोद के घर पंहुचे और उतारने लगे इतने में केबिल टूटने को लेकर पहले से आक्रोशित विनोद और परिवार के लोग जगनेटर उतार रहे लड़कों को जातिसूचक भद्दी- भद्दी गाली-गलौज करने लगे यादव जाति के लड़के विरोध करने लगे शोर- गुल सुनकर गांव के बुजुर्ग लोग मौके पर पहुंचकर विवाद को शांति कराकर बीच बचाव करके वहां से सभी लोगों को हटाकर मामले को शांति कराया इतने में किसी के सूचना पर विवाद के दस मिनट पर 112 पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर विवाद का तहकीकात शुरू कर दी लोगों से पूछताछ में केबिल टूटने को लेकर गाली-गलौज करने की बात उभरकर आई जिसकी सूचना 112 की पुलिस मौके से ही एसएचओ को पूरी घटना से अवगत कराकर दोनों पक्षों को झगड़ा झंझट न करने की हिदायत देते हुए कहा की अपनी शिकायत थाने पर जाकर दो शांति कायम बनाये रखने की अपील कर चले गए। वारदात की सूचना पर तत्काल निरीक्षक अपने हमराहियों के साथ मौका-ए-वारदात पंहुचकर दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांति कायम रखने और लोगों से सौहार्द बनाए रखनें की अपील करते हुए एहतियात बरतते हुए शांति बरकरार रहे घटनास्थल पर कुछ कांस्टेबल को छोड़कर दोनो पक्षों को थाने बुलाकर चले आए यह बात कुछ उपद्रवियों को नागवार लगा जो लोग महुआ गांव का माहौल खराब करने की मंशा पाले एससी एसटी ऐक्ट में झूठ निराधार मुकदमा दर्ज कराकर सरकार से मिलने वाली रकम को लेने के लिए असत्य मनगढ़ंत कहानी बनाकर थाना प्रभारी के ऊपर दबाव डाल कर मुकदमा दर्ज कराकर दबदबा बनाना चाहते हैं।और महुआ गांव में शांति भंग करने के फिराक में कुछ लोग लगे हुए हैं। घटनाक्रम को दृष्टिगत रखते हुए कुछ लोगों से बात करने पर रामचंद्र यादव अतुल कुमार यादव सभाजीत यादव रामकुमार वर्मा अनिल कुमार वर्मा चन्द्र देव चौहान धर्मवीर चौहान आशुतोष मौर्या अमरनाथ मौर्या आदि लोगों ने बताया कि दलित जाति के लोग अब सबर्ण और पिछड़ी जाति के लोगों का फर्जी तरीके से उत्पीड़न कर रहे हैं क्योंकि दलित वर्ग को एससी एसटी ऐक्ट के ताकत और सरकार से मिलने वाली सहायता धन राशि की कमाई के लिए झूठे मुकदमें में फंसाकर उत्पीड़न व सामाजिक शोषण कर रहे हैं दलित वर्ग के लोग सबर्ण व पिछड़ी जाति के लोगों से पहले अनायास जातिसूचक गाली-गलौज करेंगें और मारपीट फिर थाने में जाकर झूठ का दर्ज करायेंगें मुकदमा ।अगर अपने मिशन में कामयाबी नही मिली तो निशाने पर मुकामी थाना प्रभारी को लेकर झूठा आरोप लगाने लगतें हैं क्योंकि बिना दबाव में आये निर्दोष के विरुद्ध झूठे मुकदमें की कार्रवाई पुलिस न करके सत्यता पर ध्यान देकर मामलात में कृत कार्रवाई करती है।



















