छठ घाट पर मुस्लिम सफाई कर्मी शेरे अली ने पेश की मिसाल — गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत उदाहरण

Sudhanshu Mishra
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विगत कई वर्षों से करते आ रहे हैं, बेदी की रंगाई पुताई का कार्य।


संतकबीरनगर। भक्ति और आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं। श्रद्धालु जहां व्रत और पूजा की तैयारी में लीन हैं, वहीं खलीलाबाद के निवासी शेरे अली , एक सफाई कर्मी, ने अद्भुत मिसाल पेश की है। वह पिछले कई वर्षों से निःस्वार्थ भाव से छठ घाटों की सफाई और बेदी की रंगाई-पुताई का कार्य बड़े ही श्रद्धा और समर्पण के साथ करते आ रहे हैं।


जब  शेरे अली से पूछा गया कि एक मुस्लिम होते हुए वह छठ पूजा घाट की सेवा क्यों करते हैं, तो उन्होंने बड़ी सहजता से उत्तर दिया —

“काम से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता। मेहनत करने पर ही रोजी मिलती है, धर्म खाने को नहीं देता। हर धर्म की अपनी पहचान होती है, बस उसे सच्ची निष्ठा से निभाना चाहिए।”


उन्होंने आगे कहा कि समाज में आपसी भाईचारा बनाए रखना सबसे बड़ा धर्म है, और किसी भी बात को लेकर विवाद नहीं करना चाहिए।


 शेरे अली की यह सोच और सेवा भावना समाज में गंगा-जमुनी तहजीब की सजीव झलक पेश करती है, जो धार्मिक एकता और सामाजिक सौहार्द का सच्चा संदेश देती है।

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