निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका, निर्णय निरस्त करने की मांग।
संघर्ष समिति ने उठाए पांच गंभीर सवाल — बिजली कर्मियों को भी मिले दीपावली बोनस की मांग।
संतकबीरनगर। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका जताते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निजीकरण से जुड़े पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। समिति ने कहा है कि यह निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में नहीं है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
दीपावली के अवसर पर प्रदेश के 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाए।
समिति के पदाधिकारी चंद्र केश मौर्य ने कहा कि निजीकरण के प्रारंभिक चरण से ही प्रक्रिया में अनियमितता और हितों के टकराव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में नियमों की अवहेलना हुई है, जिससे बड़े घोटाले की संभावना और बढ़ गई है।
संघर्ष समिति ने उठाए पांच गंभीर सवाल —
पहला बिंदु:
पिछले वर्ष नवंबर में लखनऊ में हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 में निजी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी रही। इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन किया गया, जिसके जनरल सेक्रेटरी डॉ. आशीष गोयल (अध्यक्ष, उप्र पावर कॉर्पोरेशन) और ट्रेजरार पी. आर. कुमार (सीईओ, एनपीसीएल) बनाए गए। समिति का कहना है कि यहीं से निजीकरण की रूपरेखा तैयार की गई।
दूसरा बिंदु:
ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की नियुक्ति में हितों के टकराव को नजरअंदाज किया गया। अमेरिका में पेनल्टी लगने और झूठा शपथपत्र देने की बात स्वीकारने के बाद भी इस फर्म को नहीं हटाया गया।
तीसरा बिंदु:
निजीकरण के लिए तैयार ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को बिना सार्वजनिक किए लागू किया गया। वर्ष 2020 के पुराने डॉक्यूमेंट पर आई आपत्तियों का निस्तारण तक नहीं हुआ और नए डॉक्यूमेंट को गुपचुप तरीके से जारी कर दिया गया।
चौथा बिंदु:
पूरे निजीकरण प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर कार्यवाही की जा रही है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने स्वयं कहा है कि आरएफपी डॉक्यूमेंट उनके साथ चर्चा कर तैयार किया गया है, जिससे 'कॉर्पोरेट कार्टेल' बनने की आशंका है।
पांचवां बिंदु:
पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को इक्विटी के आधार पर औने-पौने दामों पर बेचने की कोशिश की जा रही है। इससे 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था कॉर्पोरेट कंपनियों के हाथों में चली जाएगी।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी धीरेन्द्र यादव ने कहा कि यह पूरा मामला बेहद गंभीर है। मुख्यमंत्री से मांग है कि प्रदेश की करोड़ों की संपत्तियों को लूट से बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप कर निजीकरण प्रक्रिया रोकें और सीबीआई जांच कराएं।
उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता, व्हिसल ब्लोअर और राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन मिलकर इस भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।
निजीकरण विरोधी आंदोलन के 321 दिन पूरे होने पर आज संतकबीरनगर में बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, दिलीप मौर्य, आर्यन कुमार, आशीष कुमार, भास्कर पांडेय, धीरेन्द्र यादव, अशोक कुमार, मनोज यादव, चंद्र केश मौर्य, प्रदुम्न कुमार, मनीष मिश्रा, उमेश चौधरी सहित कई बिजली कर्मचारी उपस्थित रहे।

