विडम्बना/विसंगति/परिहास/उलटबाँसी/असंगति।

Sudhanshu Mishra
0

BASTI : विडम्बना/विसंगति/परिहास/उलटबाँसी/असंगति।


बस्ती जनपद की पंचायतें –


बस्ती जनपद में पंचायतों का हाल भी बड़ा दिलचस्प है। जब-जब पुरस्कारों की बारी आती है, तब-तब ऐसा लगता है मानो कोई उलटबाँसी का खेल चल रहा हो।



पुरस्कार पाने के लिए चयन शुरू होता है तो चयनकर्ता उन पंचायतों पर नज़र गड़ाते हैं, जो तय व्यवस्था को फॉलो करे और उन ग्राम पंचायतों के आँकड़े सजाने लायक हों। परिणाम यह होता है कि खामियों के बोझ तले दबी पंचायतें ही “मॉडल पंचायत” घोषित हो जाती हैं।


लेकिन यही कहानी तब पलट जाती है, जब किसी बड़े राजनेता, मंत्री, नौकरशाह या प्रभारी मंत्री का दौरा तय होता है। अचानक वही पंचायतें खोजी जाती हैं जिन्होंने सच्चे अर्थों में काम किया हो। जिनके गाँव की सड़कें साँझ ढले भी रोशनी से जगमगाती हों, जहाँ बच्चे स्कूल समय पर पहुँचते हों, जहाँ पीने का पानी और स्वच्छता के हालात किसी मिसाल से कम न हों।


तब उन सच्ची पंचायतों को झाड़-पोंछकर अतिथियों को दिखाया जाता है। कैमरे चमकते हैं, फ़ोटो खिंचते हैं और आपस में पीठ थपथपाई जाती है। लेकिन जैसे ही कारवाँ निकल जाता है, फिर वही पुराना खेल लौट आता है — पुरस्कार उन्हीं के हिस्से में जाता है जो आँकड़ों और दिखावे के दम पर आगे रहते हैं।


गाँव का आम आदमी हतप्रभ रह जाता है —

“जिन्होंने गाँव बदला, उन्हें ताली मिली पर इनाम नहीं।

और जिन्होंने काग़ज़ पर गाँव सजाया, उन्हें इनाम मिला पर ताली नहीं।”


यही तो असली विडम्बना है —

जहाँ मेहनत करने वाला केवल दिखाने लायक बनता है, और दिखावा करने वाला इनाम जीत ले जाता है।

Tags

Post a Comment

0 Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

To Top