संवाददाता, बस्ती। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) विक्रमजोत एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों ने आरोप लगाया है कि यहां सरकारी दवाएं उपलब्ध कराने के बजाय डॉक्टरों द्वारा बाहरी मेडिकल स्टोरों की दवाएं लिखी जा रही हैं, जिससे मरीजों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
मरीजों का कहना है कि वे सरकारी अस्पताल इस उम्मीद से आते हैं कि उन्हें मुफ्त इलाज और सरकारी दवाओं का लाभ मिलेगा, लेकिन यहां पहुंचने पर उन्हें बाहर की दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। आरोप है कि अस्पताल परिसर में ही एक मेडिकल संचालक निलेश सिंह की सक्रिय मौजूदगी रहती है, जो डॉक्टरों के पास खड़े होकर मरीजों की पर्चियां लेता है और उन्हें अपनी मेडिकल दुकान से दवाएं खरीदने के लिए प्रेरित करता है।
मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पर्चियां सीधे मेडिकल संचालक को सौंप दी जाती हैं, जिसके बाद वह अपनी मनमानी दरों पर दवाएं उपलब्ध कराता है। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में सरकारी दवाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. अतुल सिंह का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका बयान प्राप्त नहीं हो सका। यदि प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराई जाती है तो पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सकती है।

