बस्ती। रेलवे स्टेशन पर 17 किलो गांजा बरामद होने के बाद एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और नशा तस्करी के नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्रवाई में गांजा तो बरामद हो गया, लेकिन इसके पीछे के तस्कर और सरगना एक बार फिर एजेंसियों की पकड़ से दूर बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि हर बार की तरह इस बार भी नशीले पदार्थ की खेप तो मिल गई, मगर उसके असली मालिकों तक जांच नहीं पहुंच सकी। लाखों रुपये कीमत का गांजा ट्रेन के कोच तक पहुंच गया, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बाद प्रेस विज्ञप्तियां और दावे तो सामने आते हैं, लेकिन तस्करी के बड़े चेहरे और पूरे नेटवर्क का खुलासा शायद ही कभी हो पाता है। यही कारण है कि नशा तस्करी का कारोबार रुकने के बजाय लगातार फल-फूल रहा है।
चर्चा यह भी है कि बस्ती जिले का इस्तेमाल नशा तस्करों द्वारा ट्रांजिट हब के रूप में किया जा रहा है। बावजूद इसके, अब तक किसी बड़े गिरोह या मास्टरमाइंड पर प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। हर बार यह कहा जाता है कि नेटवर्क की जांच की जा रही है, लेकिन नतीजे अक्सर अधूरे ही नजर आते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में गांजा ट्रेनों तक कैसे पहुंच जाता है? यदि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय है तो तस्कर बार-बार गिरफ्तारी से कैसे बच निकलते हैं? आम लोगों का मानना है कि असली सफलता तभी मानी जाएगी जब बरामद माल के साथ उसके मालिक और पूरे नेटवर्क को भी कानून के दायरे में लाया जाए।

